रविवार, 28 जून 2009

बिजनौर - रात के तीन चित्र.

भीड़ लगी होती है साब! पीछे चार कुर्सी डाल कर बैठने का भी इंतेज़ाम है. एक बार इडली खा ली थी. पता चला की बिजनौर कुछ ज्यादा ही दूर है मद्रास से!



"दिलजला टाईम्स"- न जाने कितनों के दिल जला पाता होगा!



"यू. पी. हुई हमारी है/ अब दिल्ली की बारी हैं"

5 टिप्‍पणियां:

Udan Tashtari ने कहा…

सही है, देख लिया. अब तो दोसा खिलाओ!!

मुसाफिर जाट ने कहा…

क्या बिजनौर में घूमने गए थे? अजी बिजनौर भी कोई घूमने की जगह है? मुझे तो लगता है कि कहीं आगे गए होंगे, रास्ते में बिजनौर पड़ा तो फोटो खींच लिए.

मुनीश ( munish ) ने कहा…

yaar foto kam hain, halanki badhiya cheezen kam hi hoven !

विनय (Viney) ने कहा…

@उड़न तश्तरी भाई! आपके पास पहुँचने में दोसा ठंडा भी हो जाएगा और ज़ायका भी बिगडेगा. कार्यक्रम बनाते हैं साथ खाने का!

@ मुसाफिर जाट भाई! बिजनौर में हकीक़त में घूमने लायक कुछ नहीं है. मगर अगर आप किसी पुराने शहर के पुराने हिस्सों से लगाव रखते हैं, तो शायद कुछ खोज लें. मैं काम के सिलसिले में बिजनौर में रहा. देखता हूँ कुछ और बांटने लायक मिल जाए तो...

@ मनीष भाई ! सही पकड़ा आप ने. फोटो तो लगा सकता हूँ और भी मगर ये वाली कुछ अलग सी ही थीं.

पन्चायती ने कहा…

अरे आप झालु वाले काली मन्दिर की फोटो लगाना तो भूल ही गये। उसके बिना बिजनौर अधूरा है मेरे दोस्त।